दोस्तों इस जमाने को क्या हो गया
जिसको चाहा वही वेवफा हो गया
जमाने से हम नहीं बल्कि जमाना हमसबों से है
दोस्ती नजरों से हो तो उसे कुदरत कहते है
चांद सितारों से हो तो जन्नत कहते है
हसीनों से हो तो मुहब्बत कहते है
और आपसे हो तो उसे किस्मत कहते है ।
पैसों से इतना अमीर तो नहीं हु।
पर यारों का गम खरीदने का औकात रखता हूं
दोस्ती देखनी है तो गले लगा के देखना
अगर धड़कने बढ़ न गई तो दोस्ती ठुकरा देना

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