Payar bhari sayri

 अरे कभी शोला कभी शबनम तो कभी बादल बना दिया

मुझको तेरे प्यार में पागल बना दिया

अरे तुमने बना लिया मुझे ओठों की बासुरी तो

 मैंने भी तुझे आंखों का काजल बना लिया

                      🎤

तुम से प्यार करने का ईरादा तो न था 
पर देखी जो तेरी आँखों तो नियत ही बदल गई

जिस महफ़िल ने ठुकराया हमको क्यों उसको याद करे
आगे लम्हें पुकार रहा है हमको चलो उसके साथ चले

तेरी फिदरत थी सबसे दिल लगाना
हम खामखां खुद को खुशनसीब समझ बैठे

सिगरेट🚬 जलाई थी तेरी याद भुलाने के लिए
मगर कमबख्त धुंए ने तेरी तस्वीर बना डाला

ओ शमा की महफिल ही क्या;जिसमे दिल खाक न हो।           मजा तो तब है चाहत का जब दिल तो जले; पर राख न हो






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