तु बसा ले अपनी आशियाना किसी और डाली पे
तेरी खुशी के लिए खुद को खामोश रखता हूं।
अगर कोई शिकवा है मुझसे तो जा तुझे आजाद करता हूं।
टूटकर बिखर जाते है ।
जब कोई समझकर भी खामोश हो जाते है।
और हमने समंदर लुटाया था;
कहा था काटें है राहों में
तो मैंने नूर बरसाया था।
अरे ओ कहीं और के मुसाफिर थे
मेरा शहर तो बस यूं ही बीच में आया था ।
वक्त लगा था तैयार होने मे आशियाना
तैयार हुआ तो मौसम बदल चुका था।
उसने वादा किया था 5 दिन बाद मिलने का
किसी ने बता दिया होगा कि ये दुनिया 4 दिनों की है
ओ सुगंध कहीं नही मिली💐🍁
मैने हर फूल खरीद कर देख लिया
हर कुछ बायां करने वाली लब्ज़ भी
कुछ खास पल पे खामोश हो जता है।
नजरों और बातों की जंग मे ये दिल
तेरी सादगी पे मदहोश हो जता है।
हम तो तेरी सादगी पे पुस्तक ही लिख दूं,
पर मेरे ख्यालों के आगे पुस्तक का
हर पन्ना, छोटा पड़ जाता है।
अपने लब्जों से सजा देता उसे,
अगर तारीफ का मौका मिल जाता
कम्बक्त उसकी तारीफ खुद आईने ने कर दी
तेरी नैनो के सामने ये नगर कौन देखेगा
तुम तो समंदर सी हो ये दरिया कौन देखेगा
मुझे तो डर है कि जो तेरी खूबसूरती देख ले
अगर एक बार,तब ये ताजमहल कौन देखेगा
Author :-Saurav Kumar kushwaha

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